2030 तक पूरी दुनिया का तापमान बढ़ सकता है डेढ़ डिग्री सेल्सियस।

4 months ago
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आपका भविष्य उज्जवल नहीं है बल्कि गर्मी की वजह से जल रहा है. आज एक ऐसी रिपोर्ट आई है, जिसने दुनिया भर के लोगों को परेशान कर दिया है. दुनियाभर में जो लोग सरकारें चला रहे हैं, राजनीति कर रहे हैं, कूटनीति कर रहे हैं या अपने देश की अर्थव्यवस्था संभाल रहे हैं, उनके लिए आज एक बहुत बड़ी समस्या.. रिलीज़ हुई है. आज Inter-governmental Panel on Climate Change यानी IPCC ने Global Warming को लेकर एक रिपोर्ट रिलीज़ की है. इसे जलवायु परिवर्तन पर दुनिया की सबसे बड़ी Review रिपोर्ट कहा जाता है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक पूरी दुनिया का तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है. और इस रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के लिए बहुत बुरी ख़बर है. क्योंकि इन दोनों ही देशों में जलवायु परिवर्तन की वजह से Heat Wave Effect देखने को मिलेगा.

हो सकता है कि आप ये सोच रहे हों कि इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई. उदाहरण के तौर पर आज दिल्ली में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस था. कई लोग ये कहेंगे कि अगर ये तापमान 34 डिग्री से साढ़े 35 डिग्री सेल्सियस हो जाएगा, तो उनकी ज़िंदगी पर क्या फर्क पड़ेगा? लेकिन इसे इतने हल्के में नहीं लेना चाहिए.., क्योंकि इस डेढ़ डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी से दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी. इसे थोड़ा और विस्तार से समझिए.

जब पृथ्वी का तापमान बढ़ता है तो बेमौसम बरसात होती है और इससे फसलों पर बुरा असर पड़ता है. इससे बहुत से देशों में फसल का नुकसान होगा और कई फसलों की पैदावार कम होगी. एक अनुमान के मुताबिक ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से 2060 तक फसलों के नुकसान की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था को 44 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है . ज़ाहिर है इस नुकसान में भारत का हिस्सा, बहुत ज़्यादा होगा, क्योंकि भारत में खेती बहुत ही पुराने तरीके से हो रही है.

ज़ाहिर है जब फसलों का नुकसान होता है तो महंगाई भी बढ़ती है, जिसका असर आप सबकी जेब पर पड़ता है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनिया भर की झीलें सूख जाएंगी और स्वच्छ जल की भारी कमी हो जाएगी. 2 डिग्री तापमान बढ़ने पर साफ पानी के स्रोतों में 17% की कमी आ जाएगी. पृथ्वी का तापमान बढ़ने से समुद्र का जल स्तर भी बढ़ता है. और अगर ऐसा हुआ तो समुद्र के पास बसे शहरों का बड़ा हिस्सा डूब सकता है. समुद्र का लेवल 50 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा. और इसका सबसे ज्यादा असर एशिया के देशों पर पड़ेगा, जिनमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश प्रमुख हैं . पूरे एशिया में बाढ़ की वजह से हर साल 15 करोड़ लोग प्रभावित होंगे, फिलहाल ऐसे लोगों की संख्या 7 करोड़ है. सूखे और अकाल की वजह से दुनिया भर में पर्यावरण की वजह से विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाएगी. दुनियाभर की सरकारें पर्यावरण को बचाने के लिए बहुत बड़ी रकम खर्च करने पर मजबूर हो जाएंगी. 



आप इसे पर्यावरण टैक्स भी कह सकते हैं. इतनी गर्मी की वजह से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां बढ़ जाएंगी. अभी Air Conditioner यानी AC को Luxury की वस्तु समझा जाता है, लेकिन 10 साल बाद गर्मी बहुत ज़्यादा हो जाएगी और हालात ऐसे हो जाएंगे कि AC एक मूलभूत वस्तु बन जाएगा. जिस तरह रसोई गैस के सिलेंडर के बिना काम नहीं चलता.. उसी तरह घर में AC लगवाना भी ज़रूरी हो जाएगा. आने वाले समय में ऐसा भी हो सकता है कि आपकी सैलरी में Uniform Allowance की तरह Pollution Allowance और Heat Allowance भी जोड़ना पड़े. 

ऐसा भी हो सकता है कि प्रदूषित शहरों में काम करने वाले लोग अपनी कंपनी से ये कहें कि उन्हें काम करने के लिए ज़्यादा सैलरी चाहिए. हम आपको डरा नहीं रहे हैं, बल्कि सचेत रहे हैं. इस असर को कम करने के क्या उपाय है, ये भी हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन उससे पहले आपको ये बता देते हैं कि IPCC की इस रिपोर्ट में और कौन की बड़ी बातें लिखी हुई हैं. 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनिया का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया, तो भारत में हर वर्ष भयानक गर्म हवाएं चलेंगी.. और इन हवाओं की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी. भारत ऐसी हवाओं का सामना 2015 में कर चुका है, उस वर्ष गर्मी की वजह से देश में ढाई हज़ार लोगों की मौत हुई थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर पृथ्वी का तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो 2050 तक दुनिया के बड़े शहरों में रहने वाले कम से कम 35 करोड़ लोगों पर इन गर्म हवाओं का जानलेवा प्रभाव पड़ेगा. तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए Carbon Dioxide के Emissions में 2030 तक 45% की कटौती करनी होगी. 

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि Global Warming को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के लिए 2016 से लेकर 2035 तक करीब 2 लाख 40 हज़ार करोड़ अमेरिकी डॉलर्स के निवेश की जरूरत होगी. ये पूरी दुनिया के GDP का 2.5% है. यानी Global Warming एक बहुत महंगी बीमारी है. आपने गौर किया होगा कि आप जब अपने शहर में किसी विशेष जगह पर होते हैं..तो वहां आपको ज्यादा गर्मी महसूस होती है. जबकि उसी शहर में कुछ इलाके ऐसे होते हैं जहां तापमान थोड़ा कम होता है. अगर आप किसी ग्रामीण इलाके के तापमान की तुलना आसपास के शहरी इलाके के तापमान से करेंगे तो आपको ये फर्क और भी ज़्यादा महसूस होगा. ऐसे दो इलाक़ों के तापमान के बीच का फर्क... 5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 15 डिग्री सेल्सियस तक का भी हो सकता है .

परेशानी की बात ये है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों के कुछ इलाके असामान्य रूप से गर्म हैं. ये भी Global Warming की वजह से हो रहा है. शहरों के तापमान में होने वाले इस इज़ाफे को Urban Heat Islands कहा जाता है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, कोच्चि, और चेन्नई जैसे शहरों में Heat Islands की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जैसे जैसे देश के शहर तरक्की कर रहे हैं, इन शहरों का मौसम गर्म होता जा रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि शहरों का निर्माण मौसम में आने वाले बदलाव को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा. हमारे आधुनिक शहर एक तरह से Microwave Oven बन गए हैं. जिनमें हम सभी को Bake किया जा रहा है

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कई शहरों में Heat Island Effect देखा जा रहा है. दिल्ली में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का फासला अब 2 डिग्री सेल्सियस और कम हो चुका है. चेन्नई में सुबह के वक्त सिटी सेंटर का तापमान आसपास के हरे इलाकों के मुकाबले 3 से 4.5 डिग्री सेल्सियस तक ज़्यादा होता है. इसी तरह तिरुअनंत-पुरम में जब ठंडी हवाएं चलती हैं, तो ग्रामीण इलाकों का तापमान 3 से 4 डिग्री कम हो जाता है, जबकि इस शहर के केंद्र में तापमान में सिर्फ डेढ़ से 2 डिग्री सेल्सियस की कमी आ पाती है. गुवाहाटी में शहरी इलाके आस पास के इलाकों के मुकाबले 2 डिग्री ज्यादा गर्म रहते हैं. जबकि कोच्चि में शहर का केंद्र बाकी इलाकों के मुकाबले 4.6 डिग्री सेल्सियस.. ज्यादा गर्म रहता है.

IPCC 2018 Report  (08 October 2018)


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