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राजस्थान के इतिहास में जोधपुर के पास स्थित खेजड़ली ग्राम में वर्ष 1730 के दौरान अमृतादेवी विश्नोई व उनकी तीन बेटियों सहित 363 लोगो द्वारा वृक्षों को बचाने के लिए दिया गया बलिदान, पर्यावरण संरक्षण का एक अद्भुत - अनुपम व प्रेरक प्रसंग है। उनकी स्मृति में ही संस्थान का नाम ' अमृतादेवी पर्यावरण नागरिक संस्थान ' (अपना संस्थान ) रखा गया।  

विगत कई वर्षों से प्रकृति का अत्यधिक शोषण होने के कारण पंच महाभूत यथा भ - भूमि, ग - गगन, व - वायु, आ - अग्नि और न - नीर (भगवान) की भारी क्षति हुई है। जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण मनुष्य एवं प्रकृति के संबंधों में आत्मिक भावों का आभाव है। समूचा विश्व पर्यावरण को संतुलित करने में लगा है। ऐसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, पर्यवरण संतुलन हेतु जन - जागरण करना और हरित क्रांति द्वारा पंच महाभूत को बचाना, यही संस्थान का उद्देश्य रखा गया है।   

अगस्त 2016 तक सम्पूर्ण राजस्थान में पंचायत स्तर तक पौधरोपण किया गया जिसमें मात्र 6-7 माह में 3,04,140 पौधे कुल 7209 गाँवों में लगाये गये हैं। वर्ष 2017 में अगस्त माह तक लगभग 2 लाख पौधे लगाये गये हैं, जिनमें राजस्थान के फलौदी, जालौर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, डीग, जोधपुर, कोटा, अजमेर तथा चित्तौडग़ढ़ उल्लेखनीय है। लगाये गये समस्त पौधों की 2-3 वर्षों तक देखभाल करने की व्यवस्था भी की गयी है।      

भावी कार्य योजना के अन्तर्गत 'अपना संस्थान' द्वारा वर्षा जल संरक्षण, स्वच्छता, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग, जल - वायु - ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति जैसे पर्यावरण सम्बन्धी आवश्यक प्रकल्प यथासमय चलाये जा रहे है। प्रारम्भ में पौधरोपण को ही एक अभियान के रूप में चलाया गया है ताकि अनावृष्टि, अतिवृष्टि, भूकम्प, ग्लोबल वार्मिंग जैसे प्राकृतिक प्रकोप में कमी आ सके।   

हम जो दूसरों के द्वारा लगाये गये वृक्षों का उपयोग करते हे ; यह भी एक प्रकार का ऋण है। हमें इससे मुक्ति पानी चाहिये। अतः इस ऋण से मुक्त होने के लिए, अपना दायित्व समझ कर हम भी कुछ पौधरोपण करें, उसकी देखभाल करें और उनको बड़ा करें। तो आइये अंधेरे को कोसने की बजाय एक दीप जलायें। आप और हम मिलकर हमारे पर्यावरण को हरा - भरा, प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ बनाने में शीघ्र सफल होंगे, ऐसा पूर्ण विश्वास है।   


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